हमें ही तय करना होगा कि हम किस तरह जीना चाहते हैं…..सुमित यादव

पटना

बेलगाम विकास की अंधी दौड़ ने पूरी पर्यावरण को नर्क बनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है।इस धरती पर हमारी पीढ़ी को कैसे शुद्ध हवा मिलेगी।आज कोरोना की दूसरी लहर में हम सब आक्सीजन की महत्ता को देख रहे हैं।ऑक्सीजन को लेकर मारामारी हो रही।


शहरों में अपेक्षा और जरूरत के अनुरूप हरियाली दिख नहीं रही है।रही-सही कसर हमारी जीवनशैली ने निकाल दी है। बड़े शहरों में अंधाधुंध एयर कंडीशनर का उपयोग पर्यावरण को नाश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।इसलिए पर्यावरण संरक्षण का फिर से संकल्प लेने की जरूरत है।


अब हमें ही तय करना होगा कि हम किस युग में जीना चाहते हैं? एक ऐसे युग में जहां प्रदूषित हवा और ढेर सारी खतरनाक बीमारियों हों या फिर ऐसे युग में जहां खुलकर शुद्घ हवा का आनंद लेकर एक हेल्दी लाइफ जी सकें।आज पूरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग की भयावह समस्या से परेशान है।इसको लेकर विज्ञान बार-बार चेतावनी जारी कर रहे हैं।लेकिन हम हैं कि मानते नहीं।

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