शारदा अभ्रक खदान में चाल धंसने से महिला मजदूर की हुई मौत,एक घायल और 4 लोगों के अभी दबे होने की है सूचना

नवादा (रजौली)


शुक्रवार की शाम लगभग 4 बजे रजौली थाने के सवैयाटांड़ पंचायत के चटकरी स्थित शारदा माइका माइंस का चाल धंसने से एक महिला मजदूर की मौत हो गई। जबकि एक अन्य मजदूर घायल हो गया। मृतक महिला मजदूर झारखंड के कोडरमा जिले के डोमचांच थाना क्षेत्र के कोठियार गांव की बताई जा रही है। वहीं एक अन्य घायल मजदूर की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।कथित जानकारी के मुताबिक बंद पड़े शारदा माइका माइंस में चाल धंसने से 5 लोग उसमें दब गए थे जिनमें से एक मजदूर को खनन माफियाओं द्वारा आनन-फानन में निकाल कर इलाज के लिए ले जाया गया है। वहीं 4 लोग अब भी चाल के नीचे दबे हैं। जिनमें 1-2 महिला के दबे होने की जानकारी मिल रही है।


हालांकि थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर दरबारी चौधरी ने माइंस का चाल धंसने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि घायल मजदूर का कोडरमा में कहीं इलाज चल रहा है। मामले की छानबीन की जा रही है। वहीं घटना के बाद खनन माफिया मृतक महिला के शव को लेकर फरार हो गए हैं।मिली जानकारी के मुताबिक जिस माइंस पर घटना घटी है उस माइंस पर खनन माफिया ब्रह्मदेव सिंह घटवार, सुरेश सिंह, विनोद राजवंशी, भोला तुरिया, गौतम सिंह, पांचू तुरिया, लालजीत सिंह, अल्ताफ मियां, सिकंदर तुरिया, कारु सिंह द्वारा अवैध रूप से माइका का खनन किया जा रहा है।

घटना के बाद प्रशासन को मैनेज करने का खेल हो जाता है शुरू- सवैयाटांड़ पंचायत में संचालित अवैध माइका माइंस में चाल धंसने से मजदूरों की मौत व घायल होने के बाद खनन माफियाओं द्वारा पुलिस-प्रशासन, वन विभाग के अधिकारियों को मैनेज करने का खेल शुरू हो जाता है। जानकर सूत्रों का कहना है कि खनन माफियाओं द्वारा पुलिस-प्रशासन व वन विभाग के अधिकारियों को मुंह मांगी रकम देकर उनके मुंह बंद कर दिए जाते हैं। जिससे अधिकांश मौकों पर इस मामले में प्राथमिकी तक दर्ज नहीं हो पाती है। मीडियाकर्मियों की सक्रियता पर बाद m घटना के बाद अगर जांच करने के लिए पुलिस-प्रशासन की टीम वहां पहुंचती भी है तो जांच के बाद जब टीम रजौली पहुंचती है तो या तो वे ऐसी किसी घटना से साफ इनकार कर देते हैं या ‘मौत की बात गलत है’ कहकर एक-दो मजदूर घायल है की बात कह कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।


हालांकि चाल धंसने से मजदूरों की मौत और घायल होने के मामले में गरीब व बेसहारा मजदूरों की जुबान को रुपयों से बंद कर व डरा-धमकाकर इस कदर दहशत में डाल दिया जाता है कि मौत के बाद अपनों को खोने के बाद भी बेसहारा हो चुके मजदूर के परिजन कुछ भी नहीं बताते। इससे खनन माफियाओं पर कार्रवाई करने में वरीय अधिकारियों को भी परेशानी होती है।

अकरम अली प्रसाद के साथ राजौली से पंकज कुमार की रिपोर्ट

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