योग के माध्यम से शरीर,मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है–शिखा नरूला

इस बात में कोई शक नहीं की तुम हर चीज को जो तुम्हारे साथ हो रही है उसे कंट्रोल नहीं कर सकते माना यह तुम्हारे हाथ में नहीं लेकिन उस परस्थिति में तुम क्या करते हो यह जरूर तुम्हारे ही हाथ में है।मतलब तुम्हारी लाइफ का 10 % इस चीज पर निर्भर करता है कि तुम्हारे साथ क्या हुआ लेकिन बचा 90% इस चीज पर कि तुमने क्या किया ? क्योंकि जीत की अहमियत समझने के लिए,उसकी असली कीमत जानने के लिए हारना भी बहुत जरूरी है।उसी तरह से जिस तरह की रोशनी की कीमत समझने के लिए अंधेरा भी बहुत जरूरी है यह जो हार है ना जिसे सब इतना डरते हैं ना असल में सिर्फ एक कैटालाइजर की तरह है।जो कि सिर्फ में धक्का मारती है ताकि हम अपना सब कुछ छोड़कर सिर्फ जीत के लिए दौड़ पड़े क्योंकि पेड़ एक विशाल भैया चाहे कितना ही बड़ा क्यों ना हो शुरुआत तो उसने भी एक छोटे बीज से ही की होगी और रही बात जीतने की सक्सेस की तो अरे मैं तो जानती हूं कि तुम जरूर जीत जाओगे जरूरत है।तो बस एक वादा करने की एक वादा मुझसे करो कि उस जीत तक पहुंचने से पहले चाहे जितनी दिक्कतें और चाहे जितनी कठिनाइयां आए तुम रुकोगे नहीं।


मैं बस इतना चाहती हूं कि तुम खुद के वजूद के लिए लड़ना बंद मत करो चाहे कितने ही बड़े चैलेंजेज क्यों ना आए। यहां तक की बड़ी से बड़ी प्रॉब्लम क्यों ना आ जाए , तुम्हारी विल पॉवर इतनी जरूर होनी चाहिए कि तुम्हें किसी भी चीज का डर ना हो।हमेशा ये लड़ाई सिर्फ दुनिया से ही नहीं है कई बार तो तुम्हें अपने अपनों से भी लड़ना पड़ेगा क्योंकि यह लड़ाई तुम्हारे वजूद की है प्रतीक।बहुत जल्द एक ऐसा वक्त भी आएगा कि तुम आईने में खुद को देखकर कहोगे” अबे सुन,और समझ इस बात को कि तुम जिंदगी भर क्विट नहीं कर सकते, कभी तो ऐसा वक्त आएगा ना जब तुम्हें खुद के लिए स्टैंड लेना ही होगा”


आखिर कब तक ऐसा होगा कि तुम दो कदम आगे बढ़ोगे वहां से तीन कदम पीछे चले जाओ ऐसे में तुम कभी अपनी मंजिल तक कैसे पहुंच पाओगे लड़ो तब तक लड़ो जब तक तुम्हें वह सब कुछ ना मिल जाए जिसके तुम हकदार हो।उन्नति का द्वार खोलने के लिए बस एक चाबी की जरूरत होती है।वह चाबी है- ज़िम्मेदारी।जब आप ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हैं तब आप अपने सफलता का द्वार खोल रहे होते हैं।ज़िम्मेदारी कबूल करने वाला व्यक्ति कभी भी हाथ-पर-हाथ धरे नहीं बैठता, वो कभी भी इस इंतजार में नहीं बैठता कि बिना कुछ किये उसकी जिंदगी बेहतर हो जाएगी।ज़िम्मेदारी उठाने वाला व्यक्ति अपनी तक़दीर खुद लिखता है।वह अपने काम को ईमानदारी के साथ पूरा करता है जिससे उसे संतुष्ट और ख़ुशी दोनों मिलती है।हम सब अपनी लाइफ में बहुत सारी गलतियाँ करते हैं लेकिन जो व्यक्ति अपनी ज़िम्मेदारियाँ समझता है या ज़िम्मेदारी लेता है, वो अपनी गलतियाँ कभी भी दूसरों पर नहीं थोंपता, किसी दुसरे पर इल्ज़ाम नहीं डालता,बल्कि अपनी गलतियाँ कुबूल करता है, और उन्हें कभी न दुहराने की सीख लेता है।इस दुनिया में जितने भी नेगेटिव लोग हैं और जो अपनी जिम्मेदारियों से पीछा छुड़ाते हैं।उनके साथ जब भी कुछ बुरा होता है तब वे दूसरों पर ही इल्जाम लगाते हैं।ज्यादातर लोग कुछ अच्छा होने पर तुरंत क्रेडिट ले लेते हैं मगर बहुत कम लोग ही ऐसे होते हैं जो खुद से गलती होने पर अपनी ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हैं।

अपनी जिम्मेदारी समझने वाला व्यक्ति कभी भी दूसरों पर इल्जाम नहीं लगाता।ज़िम्मेदारी कबूल करने वाला व्यक्ति सिर्फ सपने नहीं देखता

उन सपनों को जीता है, उन्हें पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर देता है । दृढ़ संकल्प इक्षा शक्ति और कड़ी मेहनत से ही अपने सपने को हम पुरा कर सकते हैं! और इसके लिए हमें अपने दिल दिमाग के बीच संतुलन बनाए रखना होगा! और ये केवल और केवल योग एवं ध्यान को अपने दिनचर्या में शामिल करने पे ही संभव है।क्यूंकि जब हम हमारा पुरा शरीर स्वस्थ्य होगा तभी हमारा काम स्वस्थ्य होगा।


शिखा नरूला कहती है कि योग एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए खुद को निरोग बनाए रखा जा सकता है। योग आसन, प्राणायाम, सूर्य नमस्कार के कई फायदे हैं।इनके जरिए शरीर को स्वस्थ और सुंदर बनाये रख सकते हैं।शिखा नरूला ने बताया कि वह खुद योगा के जरिये अपने दिन की शुरुआत करती हैं।उन्होंने कहा योग के माध्यम से शरीर,मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है।तीनों के स्वस्थ रहने से आप स्‍वयं को स्वस्थ महसूस करते हैं। योग के जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है, बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों को भी दूर किया जा सकता है। योग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर जीवन में नव-ऊर्जा का संचार करता है। योगा शरीर को शक्तिशाली एवं लचीला बनाए रखता है साथ ही तनाव से भी छुटकारा दिलाता है जो रोजमर्रा की जि़न्दगी के लिए आवश्यक है। योग आसन और मुद्राएं तन और मन दोनों को क्रियाशील बनाए रखती है। ऐसा करने से स्वास्थ्य को बेहतर किया जा सकता है।

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