आरा,में लगतार कई दिनों से दिनभर उड़ते धूल के गुब्बारों से दुर्घटनाएं यहां हो रही है

बिहार (आरा)

बिहार के भोजपुर जिले के आरा-छपरा सड़क इन दिनों लोगों के लिए बीमारियों और दुर्घटनाओं का कारण बनते दिख रहा है।क्योंकि लगतार कई दिनों से दिनभर उड़ते धूल के गुब्बारों से दुर्घटनाएं यहां हो रही है।इसके बावजूद प्रशासन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।प्रशासन की ओर से सड़क निर्माण कंपनी को सड़क पर पानी छिड़काव करने के निर्देश हैं।लेकिन इसका पालन होते नहीं दिख रहा है।इससे छात्र-छात्राओं,आम नागरिकों एवं इस मार्ग के किनारें रह रहे ग्रामीणों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।इसी मार्ग पर एक निजी स्कूल भी है जहां छोटे बच्चो को लाने-ले जाने में गार्जियन को भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है।जिस से रोड पर से उडऩे वाली धूल से ग्रामीण परेशान हैं।

लगातार उड़ते हुए धूल के गुबार से जहां इस मार्ग पर सड़क किनारे बने घरों में धूल व गंदगी का अंबार लग रहा है।वहीं इस मार्ग से आवागमन करने वाले वाहन चालकों व पैदल राहगीरों में बीमारी का खतरा बना हुआ है।लोगों का धूल मिश्रित हवा में सांस लेना मुश्किल हो रहा है।ग्रामीणों ने बताया कि यही स्थिति रही तो उनमें श्वांस रोग अथवा धूल की एलर्जी से संबंधित रोग हो सकता है।ग्रामीणों ने प्रशासन से इस ओर ध्यान देकर सड़क निर्माण कार्य में सावधान बरतने ठेकेदार को निर्देशित करने की मांग की है।ताकि नागरिकों व राहगीरों के लिए मुसीबत बने सड़क निर्माण की परेशानियों से निजात मिल सके।

लोगों ने कहा हो सकता है गंभीर बीमारी

धूल के कणों से लोगों को क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस,एलर्जिक सायनुसाइटिस व एलर्जिक राइनाइटिस जैसे रोग हो सकते हैं जो काफी दर्दकारक और गंभीर रूप से घातक साबित हो हैं। दमे के रोगी के लिए धूल भरी सड़कें काफी नुकसानदेह हो सकती हैं।धूल और धुएं के कणों से अनेक प्रकार के कार्बनिक तत्व व धातुएं लैड आदि होने के कारण ये ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।जिसके कारण कई बार गंभीर बिमारियां और फ्लू भी हो जाते हैं।धूल और धुआ मिलकर तो श्वास की नली में काफी संक्रमण फैला सकते।

तकलीफों से गुजरते हैं राहगीर

वही साथ से जो राहगीर है,काफी तकलीफों से गुजरते दिखते हैं क्योंकि सड़क पर कोईलवर से लेकर छपरा बॉर्डर तक काफी सड़क पर बालू का कण गिरा हुआ है।सड़कों के किनारे पड़ी बालू के कण नाक के रास्ते श्वास नली और सायनस में प्रवेश कर जाती है।जो कि काफी तकलीफदेह हो जाती है। सायनस में सूजन आने के कारण नाक से पानी आने लगता है और नाक बंद होने लगती है सांस लेने में तकलीफ होती है। ऐसे में यदि कोई विषाणु हमला कर दे तब रोगी और भी बुरी हालत में पहुंच जाता है।

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