आत्मा अजर, अमर, अनाशी हैं—अनुराधा सरस्वती

पटना


बिक्रम महावीर सेवा समिति द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन व्यास पीठ से सुश्री अनुराधा सरस्वती ने कहा कि सुदामा के मित्रता की चर्चा की गई।
आज कलयुग के मित्रों में स्वार्थ की भावना देखी जाती है जहां मन से अधिक धन की महत्व दिया जाता है परंतु धन्य है द्वारकाधीश उन्होंने सुदामा जैसे गरीब ब्राह्मण से मित्रता की और उन्हें द्वारिका पुरी के समान सुदामापुरी प्रदान करके सुदामा जी की श्रेष्ठता सिद्ध कर दी और अपनी दिनबंधुता सार्थक कर दी।


आज की कथा में राजा परिक्षित के मोक्ष की चर्चा की गई। सप्तमदिवस भागवत कथा श्रवण करने के पश्चाताप राजा परीक्षित की आत्मा परमात्मा में विलीन हो गई।सुखदेव महाराज जी बताते हैं कि यह शरीर भले नष्ट हो जाए पर आत्मा अजर,अमर,अविनाशी है, जिसे कोई मार नहीं सकता।प्रत्येक जीव को मृत्यु का स्वागत करना चाहिए।

अंत मे द्वादश स्कंध तीन सौ पैतीस अध्याय तथा अठारह हजार श्लोकों से बनी श्रीमद्भागवत कथा पुराण प्रणाम कर सम्पन की.
सप्तम दिवस कथा का शुभारंभ पैक्स अध्यक्ष अर्चित सिंह, धरेंद्र सिंह, साकेत सिंह के द्वारा ज्ञानदीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ की गई. कथा के दौरान वृन्दाबन से आये हुए राहुल मस्तना की टीम द्वारा अद्भुत झांकी प्रस्तुत की गई।


महावीर सेवा समिति के सदस्य मदन दास,प्रचार्य धनन्जय कुमार,शास्त्री ब्रजेश तिवारी,उद्घोषक मन्टू मस्ताना, बनवारी बाबा,ओनु कुमार,साजन कुमार, प्रभंजन कुमार,अजय कुमार, रंजीत गोस्वामी,आर्यन गुप्ता,निक्कू गुप्ता,दिलीप यादव,राजरत्न, विक्की कुमार,ओम प्रकाश गुप्ता,नन्हे मिश्रा, जनेश्वर सिंह सहित आदि लोग शामिल हैं।

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